महापौर विनोद अग्रवाल ने कर वसूली के तरीके को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर कहा है कि संपत्ति कर वसूली का काम गलत नीति से किया जा रहा है। संपत्ति स्वामियों के साथ दुर्व्यवहार भी होता है। यह नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 507, 508 और 509 की मूल भावना के विपरीत है। महापौर ने अपने पत्र में कहा है कि उत्तर प्रदेश निगम अधिनियम 1959 में करो तथा अन्य देयों की वसूली से संबंधित अध्याय 21 में दी धाराएं आपके संज्ञान में है। सदन और कार्यकारिणी के माध्यम से आपको और कर विभाग के अधिकारियों को लगातार बताया जा रहा है कि वसूली में नियमों का पालन होना चाहिए। किसी के साथ गलत व्यवहार नहीं हो। यह सुनिश्चित किया जाए कि बिना वारंट के निगम का कोई अधिकारी कर्मचारी किसी दुकान, मकान की कुर्की और सील करने की कार्रवाई न करे। इसके अलावा बिल देने के बाद लोगों को कम से कम 15 दिन का समय दिया जाए। जिनसे वसूली की कार्रवाई हो, यह भी देखा जाए कि उन्हें पक्ष रखने का मौका मिला है या नहीं। नियमों का पालन न किए जाने की बात सामने आने पर दोषी कर्मचारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। महापौर ने इस संबंध में डीएम राकेश कुमार सिंह से भी फोन पर वार्ता की। उन्हें भी सारे मामले से अवगत करा दिया है। नगर आयुक्त संजय कुमार चौहान का कहना है कि संपत्ति कर वसूली में नियमों का पालन किया जा रहा है। कहीं शिकायत है तो उसको भी दिखवा लिया जाएगा।
